रोग व लक्षण अनुसार घरेलू उपचार
10 शारीरिक संस्थानों के 156 रोगों के लिए 2,544 शास्त्रीय व प्रामाणिक घरेलू उपचार। दादी माँ के नुस्खे, काढ़ा, चूर्ण, लेप व क्षीरपाक।
12 नुस्खा टूल्स देखेंरोगानुसार नुस्खे
सभी रोग व स्थितियां (7)
अपच, अजीर्ण व बदहजमी
जठराग्नि की कमजोरी से भोजन का सम्यक पाचन न होना व आमदोष (टॉक्सिन्स) की उत्पत्ति।
शिशुओं के पेट में गैस, मरोड़ व रोना (शिशु उदरशूल)
छोटे बच्चों के नाजुक पेट में दूध पीने के बाद गैस अटकना व तेज मरोड़ होना।
डायपर रैश, शिशु की त्वचा छिलना व लाली
गीलेपन व मूत्र के तीखेपन से शिशु के कूल्हों की नाजुक त्वचा का छिलना (अहिपूतना)।
बच्चों के दांत निकलते समय कष्ट, दस्त व लार टपकना
मसूढ़ों को चीरकर दांत बाहर आते समय पित्त की गर्मी से बच्चों को दस्त व बुखार होना।
पेट के कीड़े (कृमि रोग)
आंतों में कफ व मीठे खाद्य पदार्थों के संचय से उत्पन्न परजीवी कृमि।
अनियमित मासिक, माहवारी का रुकना या देरी से आना
कफ व वात के कारण गर्भाशय स्रोतों का रुकना व आर्तव का खुलकर न आना।
संग्रहणी (आईबीएस) व आंतों की कमजोरी
ग्रहणी कला की दुर्बलता जिससे भोजन पचे बिना ही शरीर से बाहर निकल जाता है।
