रोग व लक्षण अनुसार घरेलू उपचार
10 शारीरिक संस्थानों के 156 रोगों के लिए 2,544 शास्त्रीय व प्रामाणिक घरेलू उपचार। दादी माँ के नुस्खे, काढ़ा, चूर्ण, लेप व क्षीरपाक।
12 नुस्खा टूल्स देखेंरोगानुसार नुस्खे
मातृत्व, पुरुष स्वास्थ्य व बाल चिकित्सा (18)
छोटे बच्चों का बिस्तर गीला करना (बाल शय्यामूत्र)
मूत्राशय की पेशियों की अपरिपक्वता व गहरी नींद के कारण बच्चों का बिस्तर गीला करना।
बच्चों की सर्दी-खांसी, जुकाम व सीने की घरघराहट
बाल्यावस्था स्वाभाविक रूप से कफ प्रधान होने के कारण बच्चों में जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम होना।
बच्चों का सूखा रोग, दुर्बलता व देर से चलना (फक्क रोग)
पोषण की कमी से बच्चों की हड्डियों का कमजोर होना व सूखा रोग होना।
बच्चों के पेट में कीड़े व सोते में दांत पीसना
मीठा व मिट्टी खाने से बच्चों के पेट में चुनचुने कीड़े पड़ना जिससे वे रात को दांत पीसते हैं।
रक्तप्रदर, अत्यधिक मासिक स्राव व कमजोरी
पित्त के तीखेपन से रक्त का पतला होकर अत्यधिक मात्रा में बहना (रक्तप्रदर)।
शिशुओं के पेट में गैस, मरोड़ व रोना (शिशु उदरशूल)
छोटे बच्चों के नाजुक पेट में दूध पीने के बाद गैस अटकना व तेज मरोड़ होना।
डायपर रैश, शिशु की त्वचा छिलना व लाली
गीलेपन व मूत्र के तीखेपन से शिशु के कूल्हों की नाजुक त्वचा का छिलना (अहिपूतना)।
बच्चों के दांत निकलते समय कष्ट, दस्त व लार टपकना
मसूढ़ों को चीरकर दांत बाहर आते समय पित्त की गर्मी से बच्चों को दस्त व बुखार होना।
अनियमित मासिक, माहवारी का रुकना या देरी से आना
कफ व वात के कारण गर्भाशय स्रोतों का रुकना व आर्तव का खुलकर न आना।
स्तनपान में दूध की कमी (स्तन्य क्षय)
प्रसवोपरांत रस धातु की कमजोरी से स्तनों में दूध का कम बनना जिसे शतावरी व जीरे से बढ़ाया जाता है।
शुक्राणु की कमी, वीर्य का पतलापन व वीर्य दोष
अत्यधिक पित्त की गर्मी से शुक्र की गुणवत्ता घटना व शुक्राणुओं की संख्या कम होना।
पुरुष दुर्बलता, पौरुष शक्ति की कमी व शीघ्रपतन
शुक्र धातु व वात की निर्बलता से पौरुष में कमी जिसे वाजीकरण औषधियों द्वारा पुष्ट किया जाता है।
रजोनिवृत्ति, अचानक गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेज) व चिड़चिड़ापन
मासिक धर्म बंद होने की उम्र में पित्त व वात के बढ़ने से अचानक पसीना व गर्मी लगना।
मासिक धर्म में तेज दर्द, कष्टार्तव व पेट की ऐंठन
अपान वायु के उलटे प्रवाह से गर्भाशय की मांसपेशियों में तेज ऐंठन व कष्टार्तव।
स्वप्नदोष, धातु गिरना व अनैच्छिक वीर्यपात
मानसिक उत्तेजना व वात के कुपित होने से सोते समय अनैच्छिक शुक्रपात होना।
पीसीओडी (PCOS), ओवरी में गांठें व हार्मोनल असंतुलन
कफ व चर्बी के आवरण से डिम्ब (अंडे) का न बनना व ओवरी में सिस्ट बनना।
प्रसवोपरांत देखभाल, सूतिका परिचर्या व शरीर की मजबूती
प्रसव के बाद खाली हुए उदर व गर्भाशय में वात शांति व बलवर्धन के लिए पौष्टिक योग।
श्वेतप्रदर, सफेद पानी जाना व कमर का कटना
कफ के संचय से योनि मार्ग से लगातार सफेद पानी जाना व शरीर का खोखला होना।
