रोग व लक्षण अनुसार घरेलू उपचार
10 शारीरिक संस्थानों के 156 रोगों के लिए 2,544 शास्त्रीय व प्रामाणिक घरेलू उपचार। दादी माँ के नुस्खे, काढ़ा, चूर्ण, लेप व क्षीरपाक।
12 नुस्खा टूल्स देखेंरोगानुसार नुस्खे
त्वचा, केश व प्राकृतिक सौंदर्य (20)
कील-मुंहासे, युवानपिड़का व फुंसियां
रक्त व पित्त के दूषित होने से चेहरे की तैलीय ग्रंथियों में मवाद व फुंसियां बनना।
फोड़े-फुंसी, बालतोड़ व विद्रधि
बाल टूटने या रक्त दूषित होने से त्वचा के भीतर मवाद से भरी दर्दनाक गांठ बनना।
फटी एड़ियां, बिवाई व तलवों की दरारें
वात के रूखेपन के कारण एड़ियों की त्वचा का फटना व बिवाइयां होना।
रूसी, डैंड्रफ व सिर की खुजली (दारुणक)
वात के रूखेपन व कफ के मेल से सिर की त्वचा पर पपड़ीदार रूसी व खुजली होना।
आंखों के नीचे काले घेरे व सूजन (डार्क सर्कल)
अनिद्रा, मानसिक तनाव व स्क्रीन देखने से आंखों के आसपास की नसों का काला दिखना।
फटे होंठ, पपड़ी जमना व होंठों से खून आना
होंठों में तैलीय ग्रंथियां न होने से वात द्वारा होंठों का सूखना व फटना।
एक्जिमा, छाजन व विचर्चिका
कफ व पित्त के रक्त में मिलने से त्वचा पर छाजन (एक्जिमा) होना व चिपचिपे स्राव का बहना।
बालों का झड़ना (खालित्य) व बालों का पतलापन
पित्त की अतिरिक्त गर्मी द्वारा बालों की जड़ों को सुखा देना जिससे बाल झड़ने लगते हैं।
अत्यधिक पसीना व पसीने की दुर्गंध
शरीर में अत्यधिक पित्त व गर्मी से पसीने की दुर्गंध व अधिक मात्रा में स्राव।
चेहरे की झाइयां, काले धब्बे व मेलास्मा
भ्राजक पित्त के कुपित होने से त्वचा पर मेलेनिन का अधिक संचय व झाइयां बनना।
चेहरे की झुर्रियां, महीन रेखाएं व ढीली त्वचा
रस व मांस धातु के क्षीण होने से त्वचा का लचीलापन घटना व झुर्रियां पड़ना।
दाद, खाज व कवक संक्रमण (दद्रु)
कफ व पित्त की विकृति से जांघों या त्वचा पर गोल छल्लेदार दाद व असहनीय खुजली।
घाव के पुराने निशान, दाग व स्कार्स
घाव भरने के बाद छूटे जिद्दी निशान जिन्हें वर्ण्य औषधियों द्वारा सामान्य रंग में लाया जाता है।
इंद्रलुप्त, उड़नछू गंजापन व बालों का उड़ना
रोमकूपों में कफ व रक्त का अवरोध होने से अचानक किसी स्थान के बालों का पूरी तरह उड़ जाना।
बालों का असमय सफेद होना (पालित्य)
क्रोध, तनाव व पित्त वर्धक खान-पान से बालों की जड़ों में मेलेनिन का क्षय व बाल सफेद होना।
घमौरियां व गर्मियों की चुभने वाली फुंसियां
गर्मियों में पसीने की नलियों के बंद होने से त्वचा पर चुभने वाली नन्हीं फुंसियां।
सोरायसिस, किटीभ कुष्ठ व चांदी जैसी पपड़ी
वात व कफ के प्रकोप से त्वचा का मछली के शल्क जैसा सूखा, खुरदरा व पपड़ीदार हो जाना।
स्ट्रेच मार्क्स, किक्किस व खिंचाव के निशान
गर्भावस्था या तेजी से वजन घटने-बढ़ने से पेट की त्वचा के रेशे फटने से बनी धारियां।
धूप से सांवलापन, टैनिंग व चेहरे का निस्तेज होना
सूर्य के तीखे ताप से भ्राजक पित्त का कुपित होना व चेहरे का रंग काला पड़ना।
शीतपित्त, पित्ती उछलना व एलर्जी चकत्ते
ठंडी हवा लगने या पित्त प्रकोपक आहार से शरीर पर बड़े-बड़े लाल चकत्ते (पित्ती) उभरना।
