मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) व मूत्राशय की सूजन के लिए हींग का काढ़ा (क्वाथ)
- **हर्बल जल से बाल धोना:** नीम, तुलसी या रोजमेरी के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें; बाल धोने के बाद अंत में इस पानी से सिर धोएं।
सही जल संकोचन और आंच के बिना काढ़े का औषधीय सत्व सक्रिय नहीं होता। शार्ङ्गधर संहिता के शास्त्रीय अनुपातों (16:4, 8:2) के अनुसार पानी की मात्रा, सिमरिन्ग समय और बैच आकार की सटीक गणना करें।
बर्तन को ढकें नहीं (खुला रखें), ताकि जलवाष्प उड़कर औषधीय सत्व गाढ़ा हो सके
पहला उबाल आने के बाद मंद आंच (मृदु अग्नि) पर पकाएं
जड़ी-बूटियों को बिल्कुल बारीक पाउडर न बनाएं; दरदरा (जौ कूट) रखें ताकि जल में सत्व भलीभांति घुले।
बनने के 12 घंटे के भीतर गुनगुना पिएं। बासी काढ़ा दोबारा न उबालें।
कठोर जड़ें, पेड़ की छाल, सख्त बीज (गिलोय, दशमूल, अश्वगंधा जड़)
प्रमुख लाभ: मौसमी सर्दी, जुकाम, गले की खराश व फेफड़ों में कफ का जमाव
प्रमुख लाभ: कमर दर्द, साइटिका, सर्वाइकल, जोड़ों में अकड़न, प्रसूति पश्चात दुर्बलता
प्रमुख लाभ: सूखी या कफ वाली खांसी, दमा, सीने में जमाव, हाथ-पैरों में जलन व मन्द ज्वर
प्रमुख लाभ: कब्ज, पाचन दुर्बलता, आंखों की थकान व जलन, रक्त शुद्धि
प्रमुख लाभ: पेशाब में जलन, खट्टी डकारें, सीने में जलन, तेज प्यास व गर्मी से बेचैनी
प्रमुख लाभ: भूख न लगना, पेट फूलना, भारीपन, जीभ पर सफेद मैल, साइनस व मंद चयापचय