काढ़ा, कषाय व चूर्ण निर्माण कैलकुलेटर
सही जल संकोचन और आंच के बिना काढ़े का औषधीय सत्व सक्रिय नहीं होता। शार्ङ्गधर संहिता के शास्त्रीय अनुपातों (16:4, 8:2) के अनुसार पानी की मात्रा, सिमरिन्ग समय और बैच आकार की सटीक गणना करें।
12 नुस्खा टूल्स देखेंकाढ़ा व चूर्ण
तीव्र कषाय (सघन पारंपरिक काढ़ा)
शार्ङ्गधर संहिता: काढ़ा निर्माण के 5 सुवर्ण नियम
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1
ढक्कन खुला रखें (Lid Rule):
खुला बर्तन; बीच-बीच में चलाते रहें ताकि औषधि नीचे न चिपके
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2
मृदु अग्नि (Gentle Simmer):
धीमी आंच
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3
दरदरा चूर्ण (Coarse Powder):
जड़ी-बूटियों को बिल्कुल बारीक पाउडर न बनाएं; दरदरा (जौ कूट) रखें ताकि जल में सत्व भलीभांति घुले।
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4
ताजा सेवन अवधि (Shelf Life):
8 से 10 घंटे के अंदर सेवन करें
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5
उपयुक्त द्रव्य (Best Botanicals):
मध्यम कठोर द्रव्य, तना, सोंठ, मुलेठी, त्रिफला
6 सिद्ध शास्त्रीय काढ़ा व चूर्ण योग
आयुष मंत्रालय अनुशंसित रोग प्रतिरोधक काढ़ा
प्रमुख लाभ: मौसमी सर्दी, जुकाम, गले की खराश व फेफड़ों में कफ का जमाव
दशमूल क्वाथ (वात शामक व तंत्रिका पोषक)
प्रमुख लाभ: कमर दर्द, साइटिका, सर्वाइकल, जोड़ों में अकड़न, प्रसूति पश्चात दुर्बलता
सितोपलादि चूर्ण (खांसी, जुकाम व फेफड़ों का बल)
प्रमुख लाभ: सूखी या कफ वाली खांसी, दमा, सीने में जमाव, हाथ-पैरों में जलन व मन्द ज्वर
त्रिफला क्वाथ व शीतल नेत्र प्रक्षालन
प्रमुख लाभ: कब्ज, पाचन दुर्बलता, आंखों की थकान व जलन, रक्त शुद्धि
धनिया हिम (अम्लपित्त व मूत्र दाह शामक)
प्रमुख लाभ: पेशाब में जलन, खट्टी डकारें, सीने में जलन, तेज प्यास व गर्मी से बेचैनी
त्रिकटु चूर्ण (जठराग्नि प्रदीपक व आम पाचक)
प्रमुख लाभ: भूख न लगना, पेट फूलना, भारीपन, जीभ पर सफेद मैल, साइनस व मंद चयापचय
