पेट का तेज दर्द व मरोड़ (उदरशूल)
Udarashula (उदरशूल)
रुकी हुई वात के कारण आंतों में तीव्र संकोच व असहनीय पेट दर्द।
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Udarashula (उदरशूल)
रुकी हुई वात के कारण आंतों में तीव्र संकोच व असहनीय पेट दर्द।
Amlapitta (अम्लपित्त)
आमाशय में अतिरिक्त पित्त व अम्ल का संचय, जिससे सीने में जलन व खट्टी डकारें आती हैं।
Yuvanapidika / Mukhadushika (युवानपिड़का)
रक्त व पित्त के दूषित होने से चेहरे की तैलीय ग्रंथियों में मवाद व फुंसियां बनना।
Atisara (अतिसार)
आंतों में जल धातु की अधिकता व अग्निमांद्य से बार-बार पानी जैसे दस्त होना।
Dantashula & Krimidanta (दन्तशूल व कृमिदन्त)
दांतों में कृमि (बैक्टीरिया) द्वारा कैविटी बनाना व वात के प्रकोप से तीव्र पीड़ा होना।
Shayyamutra (शय्यामूत्र)
गहरी तंद्रा व अपान वायु की निर्बलता से सोते समय पेशाब का छूट जाना।
Vataja Pratishyaya (वातज प्रतिश्याय)
धूल, परागकण या ठंडी हवा से नासा मार्ग की अतिसंवेदनशीलता व लगातार छींकें।
Hrichchhula (हृच्छूल)
हृदय की धमनियों में पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने से सीने में भारी दबाव व दर्द (हृच्छूल)।
Hridaya Sroto-Rodha (हृदय स्रोतोरोध)
हृदय की धमनियों में कफ व चर्बी के जमाव से रक्त प्रवाह में अवरोध पैदा होना।
Ardita (अर्दित)
चेहरे की नसों में तीव्र वात प्रकोप से मुंह का एक तरफ मुड़ जाना व पलक न झपकना।
Bastishula (बस्तिशूल)
अपान वात के प्रकोप से मूत्राशय की दीवारों में अचानक तीव्र संकोच व मरोड़ होना।
Sheetada & Danta-Veshta (शीताद)
कफ व रक्त के दूषित होने से मसूढ़ों का स्पंज की तरह फूलना व आसानी से खून बहना।