घुटनों का दर्द, संधिवात व जोड़ों में घिसाव के लिए हल्दी का सिद्ध तेल
- **जोड़ों का दर्द और गठिया:** सरसों के तेल में लहसुन की कलियां पकाकर उस गुनगुने तेल से रोज मालिश करें; गर्म दूध में हल्दी और थोड़ा गुड़ मिलाकर पिएं।
जीवन के दो छोर—बचपन और बुढ़ापा—विशेष संवेदनशीलता मांगते हैं। बालकों की सुकुमार धातुएं और वृद्धों की वात-प्रधान दुर्बलता के लिए तीव्र औषधियां वर्जित हैं। शार्ङ्गधर संहिता के आयु-मात्रा नियमों अनुसार सौम्य, सुरक्षित व मधुर अनुपान युक्त नुस्खे।
वृद्धावस्था स्वाभाविक रूप से वात काल होती है। इसमें धातुओं का क्षय, जोड़ों की चिकनाई में कमी (कट-कट व दर्द), आंतों में रूखापन (कब्ज) और स्मृति क्षीण होने लगती है। जरा विज्ञान का मूल सिद्धांत स्निग्ध (चिकनाई युक्त), बल्य, वातशामक और मेध्य (मस्तिष्क पोषक) नुस्खे देना है।
निर्माण: 4 कली लहसुन कुचलकर 100 मिली पानी और 100 मिली दूध में धीमी आंच पर पानी जलने तक पकाएं (केवल दूध बचे)। छानकर गुनगुना पिएं।
निर्माण: 200 मिली गुनगुने दूध में आधा चम्मच बादाम रोगन + 1 चुटकी जायफल पाउडर + 1 चुटकी इलायची मिलाएं।
निर्माण: आधा चम्मच हरड़ चूर्ण + 1 चम्मच शुद्ध अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) गुनगुने पानी में घोलें।