बाल व वृद्ध सौम्य देखभाल (Child & Elderly Care)
जीवन के दो छोर—बचपन और बुढ़ापा—विशेष संवेदनशीलता मांगते हैं। बालकों की सुकुमार धातुएं और वृद्धों की वात-प्रधान दुर्बलता के लिए तीव्र औषधियां वर्जित हैं। शार्ङ्गधर संहिता के आयु-मात्रा नियमों अनुसार सौम्य, सुरक्षित व मधुर अनुपान युक्त नुस्खे।
12 नुस्खा टूल्स देखेंबाल व वृद्ध
जरा स्वास्थ्य (वृद्धावस्था व रसायन — 60+ वर्ष वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य)
वृद्धावस्था स्वाभाविक रूप से वात काल होती है। इसमें धातुओं का क्षय, जोड़ों की चिकनाई में कमी (कट-कट व दर्द), आंतों में रूखापन (कब्ज) और स्मृति क्षीण होने लगती है। जरा विज्ञान का मूल सिद्धांत स्निग्ध (चिकनाई युक्त), बल्य, वातशामक और मेध्य (मस्तिष्क पोषक) नुस्खे देना है।
लहसुन क्षीरपाक (वरिष्ठ जोड़ों का दर्द, साइटिका व हृदय रक्षक)
निर्माण: 4 कली लहसुन कुचलकर 100 मिली पानी और 100 मिली दूध में धीमी आंच पर पानी जलने तक पकाएं (केवल दूध बचे)। छानकर गुनगुना पिएं।
बादाम-जायफल स्वर्ण दुग्ध (अनिद्रा, मानसिक शांति व नसों का बल)
निर्माण: 200 मिली गुनगुने दूध में आधा चम्मच बादाम रोगन + 1 चुटकी जायफल पाउडर + 1 चुटकी इलायची मिलाएं।
एरंड तैल व हरड़ कोष्ठ शोधन (हठयुक्त कब्ज निवारक)
निर्माण: आधा चम्मच हरड़ चूर्ण + 1 चम्मच शुद्ध अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) गुनगुने पानी में घोलें।
