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Complete Gayatri Mantra Collection — सभी गायत्री मंत्र संग्रह

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अक्षर

॥ श्री स्तोत्रम् ॥

नमस्ते सर्वलोकानां जनन्यै पुण्यमूर्तये।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥१॥

या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी

गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।

लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः

नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता॥२॥

या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी

गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।

या सा पद्मासनस्था सकलगुणमयी पद्मपत्रायताक्षी

नारायणस्य मुद्रा विपुलफलकरी दैत्यसंहारिणी॥३॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे।

भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यं॥४॥

विश्वामरेश्वरं देवं विनोदं यस्य संश्रिता।

प्रसीदं सर्वलोकानां जननीं त्वां नमाम्यहम्॥५॥

नारायणीं महामायां श्रीं ह्रीं क्लीं नमोनमः।

पद्मासनस्थां प्रपद्येऽहं पद्महस्तां हरिप्रियाम्॥६॥

पद्मानने पद्मविशालनेक्षीं पद्मप्रिया पद्मगभां।

पद्मप्रदां पद्मवरान्मां भजेऽहं पद्ममाले॥७॥

त्वं हि माता च पिता त्वं त्वं हि बन्धुश्च सखा त्वम्।

त्वं हि विद्या द्रविणं त्वं त्वं हि सर्वं मम देवदेव॥८॥

दुःख दारिद्र्य विनाशिनि धनसमृद्धिं कुरु कुरु।

सर्वदा सर्वदा देवि श्रीं नमोनमः॥९॥

॥ इति श्री लक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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