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श्री त्रिपुरा सुन्दरी चालीसा

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अक्षर

॥ दोहा ॥

त्रिपुरा सुन्दरी त्रिपुरेशी, श्रीविद्या अवतार।

षोडशी माँ कृपा करहु, काटहु भव अंधकार॥

॥ चौपाई ॥

1. जय जय ललिता त्रिपुरा माता। तव गुण महिमा जग विख्याता॥

2. सुन्दरी राजराजेश्वरी देवी। सुर नर मुनि चरणन सेवी॥

3. षोडशी रूप अनूप तुम्हारा। चन्द्र कला सा तेज अपारा॥

4. आदि शक्ति श्रीविद्या रानी। ज्ञान भक्ति की तुम वरदानी॥

5. श्रीचक्र सिंहासन पर सोहों। भक्त हृदय में नित ही मोहों॥

6. कदंब वन निवास तुम्हारा। करुणा सागर जग उजियारा॥

7. पाश अंकुश धनुष बाण धारी। त्रिभुवन मोहन शक्ति तुम्हारी॥

8. ब्रह्मा विष्णु शिव सब ध्यावें। सिद्ध योगिनी शीश नवावें॥

9. दश महाविद्या रूप तुम्हारे। साधक जन के संकट टारे॥

10. काली तारा भुवनेश्वरी। छिन्नमस्ता भैरवी धरी॥

11. धूमावती बगला मातंगी। कमला सहित शक्ति अभंगी॥

12. ललिता नाम जपे जो कोई। चित्त शुद्धि सुख संपद होई॥

13. भण्डासुर मद हरण कराला। धर्म रक्षा कीन्ह दयाला॥

14. मंत्र तंत्र यंत्र की धारा। तुम बिन कौन करे उजियारा॥

15. बालार्क सम अरुणा छवि प्यारी। देहु भक्ति भव भय हारी॥

16. मणिद्वीप महिमा अति न्यारी। अमृत धारा करुणा भारी॥

17. कामेश्वर संग सदा बिराजे। प्रेम ज्ञान के दीपक साजे॥

18. नित्यकल्याणी मंगलमयि। भक्तन की तुम परम सहाय॥

19. कुंडलिनी में ज्योति जगाओ। मूल से सहस्रार चढ़ाओ॥

20. इड़ा पिंगला सुषुम्ना ध्यानी। साधक पावे शक्ति सुहानी॥

21. त्रिपुर भेद तुम ही बतलाती। जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति समाती॥

22. तुरीया पद की दाती माता। मोक्ष मार्ग करहु विख्याता॥

23. अज्ञान तम का नाश करावो। ज्ञान सुधा उर बीच बरसावो॥

24. रोग शोक दरिद्रता हारी। त्रिपुरे माँ कृपा तुम्हारी॥

25. शुक्रवार जो पूजन करई। मनोकामना शुभ फल धरई॥

26. लाल पुष्प अरु दीप चढ़ावे। कृपा दृष्टि माँ शीघ्र ही पावे॥

27. सौभाग्य दायिनी सुखकारी। संतति विद्या धन भंडारी॥

28. राज्य मान विजय प्रदाता। शत्रु भय सब दूर हटाता॥

29. मधुर वाणी बुद्धि प्रकाशो। दुष्ट विचारन को तुम नाशो॥

30. भय भ्रम मोह वासना टारो। चरण शरण में जन को धारो॥

31. भक्त भक्ति से नाम पुकारे। माँ दौड़ी आवो दुख हारे॥

32. शरणागत की लाज बचाओ। त्रिपुरा सुन्दरी कृपा बरसाओ॥

33. नवावरन पूजन की महिमा। संत हृदय में तुमरी गरिमा॥

34. श्रीविद्या साधन फलदायी। गुरु कृपा से सिद्धि समाई॥

35. वेद पुराण स्तुति सब गावें। शक्ति बिना जग चल न पावें॥

36. जननी तुम करुणा की धारा। भवसागर की नौका प्यारा॥

37. जो चालीसा प्रेम से गावे। भक्ति ज्ञान वैभव फल पावे॥

38. ललिते माता दीन दयाला। करहु कृपा हटे जंजाला॥

39. मन मंदिर में सदा बिराजो। पाप ताप सब आजहि भाजो॥

40. दास विनय कर चरणन लागे। त्रिपुरा माँ सब भाग्य जगावे॥

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