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आरती
आरती

सिंहासनासीन भगवान् श्रीरामचन्द्र

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अक्षर

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,

सत् चित् आनन्द स्वरूप की।

सिंहासनासीन भगवान् श्रीरामचन्द्र की आरती ॥

दशरथ नन्दन, कौशल्या माता,

जनक सुता संग शोभा पाता।

लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न भाई,

हनुमत सेवा में सुखदाई ॥

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,

सत् चित् आनन्द स्वरूप की।

सिंहासनासीन भगवान् श्रीरामचन्द्र की आरती ॥

नील कमल सम श्याम शरीरम्,

पीताम्बर सोहे अति गंभीरम्।

मुकुट कुण्डल कर धनुष बाणा,

भक्तन के मन को हरषाना ॥

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,

सत् चित् आनन्द स्वरूप की।

सिंहासनासीन भगवान् श्रीरामचन्द्र की आरती ॥

अयोध्यापति, रघुकुल नायक,

दीनबन्धु, भव भय विनायक।

शरण पड़े की लाज बचाई,

भव सागर से पार लगाई ॥

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,

सत् चित् आनन्द स्वरूप की।

सिंहासनासीन भगवान् श्रीरामचन्द्र की आरती ॥

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