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आरती
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श्रीमद्भागवत

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अक्षर

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

अमर ग्रन्थ यह मुक्ति पंथ यह |

पंचम वेद निराला है |

ज्ञान गंगा है, भक्ति जमुना है |

त्रिवेणी का संगम है ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

शांत रस की वर्षा करता |

मोक्ष का मार्ग दिखाता है |

कर्म, ज्ञान, भक्ति का संगम |

जीवन को सुखमय बनाता है ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

जो सुने, जो पढ़े, जो गावे |

भवसागर से तर जावे |

कथा इसकी जो कोई सुनावे |

जन्म-जन्म के पाप मिटावे ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

सत्य स्वरूप, मुक्ति दाता |

परम धर्म का यह ज्ञाता |

कलि काल में यह ही सहारा |

भव सिंधु से पार उतारा ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

शुकदेव जी ने इसे सुनाया |

परीक्षित को मोक्ष दिलाया |

व्यास जी ने इसे रचाया |

ज्ञान का दीपक जलाया ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

नित नव मंगल करता |

दुःख दारिद्र्य हरता |

जो कोई श्रद्धा से गावे |

मनवांछित फल पावे ||

जय जय श्री भागवत भगवान की आरती |

पापियों को पाप से है तारती ||

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