Skip to main content मुख्य सामग्री पर जाएँ
English में भी उपलब्ध — ऊपर नेविगेशन से बदलें
आरती
आरती

श्रीमद्भगवद्गीता

पाठ पढ़ें, सुनें या अर्थ के साथ अपनी गति से आगे बढ़ें।

Bhagavad Gita मुफ़्त
सुनें या देखें

पाठ के साथ जुड़ें

वीडियो देखेंजब आप तैयार हों तब खोलें खोलेंबंद करें
आपका पाठ

अपनी गति से पढ़ें

मूल पाठ, रोमन लिपि या अर्थ चुनें। अक्षरों का आकार और पृष्ठभूमि भी बदल सकते हैं।

अक्षर

जय भगवद्गीते, जय भगवद्गीते।

हरि-हिय-कमल-विहारिणि सुन्दर सुपुनीते॥

जय भगवद्गीते...

कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि, कामासक्तिहरा।

तत्त्वज्ञान-विकासिनि, पापनाशिनी परा॥

जय भगवद्गीते...

स्वार्थ-रहित शुचि प्रेम, निरमल मोक्ष प्रदायिनी।

अज्ञान-तिमिर-नाशिनि, ज्ञान-प्रकाशिनि॥

जय भगवद्गीते...

मोक्ष-मार्ग-प्रदर्शिनि, भव-भय-हारिणि।

असुर-भाव-विनाशिनि, सद्भाव-कारिणि॥

जय भगवद्गीते...

शान्ति-सुधा-वर्षिणि, ताप-त्रय-नाशिनि।

अजर-अमर-पद-दायिनि, मुक्ति-प्रकाशिनि॥

जय भगवद्गीते...

ज्ञान-गंगा-जल-पावन, भव-भय-नाशिनि।

सुख-शान्ति-प्रदायिनि, भव-ताप-हारिणि॥

जय भगवद्गीते...

श्रद्धा-भक्ति-प्रदायिनि, सद्गति-कारिणि।

नित्य-निरन्तर-पाठिनि, भव-सागर-तारिणि॥

जय भगवद्गीते...

आरती जो कोई गावे, ज्ञान-प्रकाश पावे।

सुख-शान्ति-समृद्धि पावे, भव-सागर तर जावे॥

जय भगवद्गीते...

पाठ पूर्ण

एक शांत क्षण लें

पाठ के भाव को मन में रहने दें, फिर चाहें तो दोबारा पढ़ें या संबंधित प्रार्थना चुनें।

संग्रह पर जाएँ
Kriyasya
✦ Talk to AI Companion →