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आरती
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श्रीयमुनाजी

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अक्षर

जय जय श्री यमुना मैया, जय जय श्री यमुना मैया।

फल पावे जो नर ध्यावे, सुख पावे जो नर गावे, जय जय श्री यमुना मैया॥

पतित पावनी यमुना मैया, भव भय हारिणी यमुना मैया।

कालिंदी तट पर खेलत, कृष्ण संग रास रचत, जय जय श्री यमुना मैया॥

सूर्य सुता तुम, यम भगिनी, कृष्ण प्रिया तुम, जग जननी।

गोकुल की शोभा तुम ही, वृंदावन की जीवनदायिनी, जय जय श्री यमुना मैया॥

अष्ट सखी संग, रास रचत, मुरली मधुर बजावत।

श्याम सुंदर संग, लीला करत, भक्तन के दुख हरत, जय जय श्री यमुना मैया॥

जो कोई आरती गावे, मनवांछित फल पावे।

जन्म जन्म के पाप मिटावे, अंत में मोक्ष पावे, जय जय श्री यमुना मैया॥

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