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आरती
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श्री विठोबा आरती

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अक्षर

युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा।

वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा॥

पुंडलिकाचे भेटी परब्रह्म आले गा।

चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥१॥

जय देव जय देव जय पांडुरंगा।

रखुमाई वल्लभा राईच्या वल्लभा पावे विठ्ठला पंढरीनाथा॥ध्रु॥

तुळसी माळा गळा कर ठेवुनी कटी।

कांसे पीतांबर कस्तुरी लल्लाटी॥

देव सुरवर नित्य येती भेटी।

गरुड हनुमंत पुढे उभे राहती॥२॥

जय देव जय देव जय पांडुरंगा।

रखुमाई वल्लभा राईच्या वल्लभा पावे विठ्ठला पंढरीनाथा॥ध्रु॥

धन्य पंढरी धन्य भीमा नदी।

धन्य पुंडलिक ज्याचे भाग्य अगाधी॥

धन्य विठ्ठल जो उभा युगायुगी।

धन्य भक्तजन जे येती दर्शनासी॥३॥

जय देव जय देव जय पांडुरंगा।

रखुमाई वल्लभा राईच्या वल्लभा पावे विठ्ठला पंढरीनाथा॥ध्रु॥

आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती।

चंद्रभागेमाजी स्नाने जे करिती॥

दर्शन हेळामात्रे तया होय मुक्ती।

केशवराज विठ्ठल ऐसे नाम गाती॥४॥

जय देव जय देव जय पांडुरंगा।

रखुमाई वल्लभा राईच्या वल्लभा पावे विठ्ठला पंढरीनाथा॥ध्रु॥

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