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आरती
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श्री शांता दुर्गेची आरती (मराठी)

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Durga मुफ़्त
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अक्षर

जय देवी जय देवी जय शांते जननी। दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी॥ ध्रु०॥

भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी। शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी। असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी॥ १॥

कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा। सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा॥ २॥

अंबे भक्तांसाठी होसी साकार। नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर॥ ३॥

शंखचक्रगदापद्म आयुधे हाती। महिषासुरमर्दिनी तूच जगज्जननी॥ ४॥

आरती ओवाळू तुजला भक्तजन। शांतादुर्गे माते देई वरदान॥ ५॥

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