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आरती
आरती

श्रीजानकीजी

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अक्षर

आरती श्री जानकी जी की कीजै।

रामचन्द्र जी के चरनन लीजै॥

प्रथम मुनि विश्वामित्र पधारे।

जनकपुरी में यज्ञ सँवारे॥

धनुष यज्ञ का किया विचारा।

शिव धनुष को राम ने तोड़ा॥

सीता जी ने जयमाला डाली।

रामचन्द्र जी से ब्याही॥

लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न संग आए।

चारों भ्राता ब्याह रचाए॥

अयोध्या में आनन्द छाया।

रामचन्द्र जी ने राज संभाला॥

वनवास को रामचन्द्र जी गए।

सीता लक्ष्मण संग में लिए॥

रावण ने सीता हरण किया।

लंका में ले जाकर रखा॥

हनुमान जी ने पता लगाया।

रामचन्द्र जी को बताया॥

सेतु बाँधकर लंका गए।

रावण को मारकर सीता लाए॥

अयोध्या में फिर से आए।

राज तिलक कर सुख पाए॥

जो कोई आरती गावे।

मनवांछित फल पावे॥

आरती श्री जानकी जी की कीजै।

रामचन्द्र जी के चरनन लीजै॥

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