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आरती
आरती

श्रीजानकीजी

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अक्षर

आरती श्री जानकी जी की कीजे |

रामचन्द्र जी के चरण कमलन चित दीजे ||

प्रथम मुनि विश्वामित्र तपस्या कीन्ही |

पुत्री यज्ञ भूमि से प्रगट भई लीन्ही ||

तापर नामकरण जनक जी ने कीन्हा |

अति आनंद से नाम जानकी दीन्हा ||

सुंदर श्याम शरीर राम जी को भाया |

स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ कर पाया ||

लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न तीनों भाई |

संग में लेकर जनकपुर में आए ||

चारों भ्राता संग में ब्याहे गए |

अयोध्या में आनंद मंगल छाए ||

चौदह वर्ष वनवास राम जी को दीन्हा |

संग में जानकी जी ने दुःख सुख लीन्हा ||

रावण हरण कर ले गया लंका में |

हनुमान जी ने खोज की अशोक वाटिका में ||

राम जी ने रावण को युद्ध में मारा |

जानकी जी को वापस ले आए प्यारा ||

अयोध्या में राज्याभिषेक हुआ |

जानकी जी का नाम जग में अमर हुआ ||

जो कोई आरती जानकी जी की गावे |

रामचन्द्र जी के चरणों में सुख पावे ||

पाठ पूर्ण

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