Skip to main content मुख्य सामग्री पर जाएँ
English में भी उपलब्ध — ऊपर नेविगेशन से बदलें
आरती
आरती

श्री गोवर्धन आरती

पाठ पढ़ें, सुनें या अर्थ के साथ अपनी गति से आगे बढ़ें।

Govardhan मुफ़्त
सुनें या देखें

पाठ के साथ जुड़ें

वीडियो देखेंजब आप तैयार हों तब खोलें खोलेंबंद करें
आपका पाठ

अपनी गति से पढ़ें

मूल पाठ, रोमन लिपि या अर्थ चुनें। अक्षरों का आकार और पृष्ठभूमि भी बदल सकते हैं।

अक्षर

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥1॥

तेरे ऊपर छतरी बिरज रही, और ध्वजा रही फर्राय।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥2॥

तेरे ऊपर मोर मुकुट सोहे, और गले में वैजयंती माल।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥3॥

तेरे ऊपर धूप दीप नैवेद्य, और आरती हो रही है।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥4॥

तेरे ऊपर ग्वाल बाल सब, और सब भक्तन की भीड़।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥5॥

तेरे ऊपर कृष्ण कन्हैया, और राधा रानी साथ।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, और चार कोस को धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥6॥

यह आरती जो कोई गावे, सो नर पावे मुक्ति धाम।

श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥7॥

पाठ पूर्ण

एक शांत क्षण लें

पाठ के भाव को मन में रहने दें, फिर चाहें तो दोबारा पढ़ें या संबंधित प्रार्थना चुनें।

संग्रह पर जाएँ
Kriyasya
✦ Talk to AI Companion →