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आरती
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श्री दत्तात्रेय आरती

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अक्षर

त्रिगुणात्मक त्रिमूर्ती दत्त हा जाणा ।

त्रिगुणी अवतार तुझा बहुजना ॥

नेति नेति शब्द न ये अनुमाना ।

सुरवर मुनिजन योगी समाधि न ये ध्याना ॥१॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता ।

आरती ओवाळू तुजला श्री गुरुदत्ता ॥ध्रु॥

सबाह्य अभ्यंतरी तू एक दत्त ।

अभाग्यासी कैची कळेल ही मात ॥

पराही परतली नाही नाही म्हणत ।

अनुभवें तृप्ती झाली तुझी पाहत ॥२॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता ।

आरती ओवाळू तुजला श्री गुरुदत्ता ॥ध्रु॥

दत्त दिगंबर या ऐसे अवधूत ।

शब्दे परब्रह्म तू प्रगटलासी येथ ॥

अनासूयात्मजा त्रैलोक्यनाथ ।

भक्तजन ताराया तूच समर्थ ॥३॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता ।

आरती ओवाळू तुजला श्री गुरुदत्ता ॥ध्रु॥

हर हर हर हर हर हर हर हर ।

हर हर हर हर हर हर हर हर ॥

हर हर हर हर हर हर हर हर ।

हर हर हर हर हर हर हर हर ॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता ।

आरती ओवाळू तुजला श्री गुरुदत्ता ॥ध्रु॥

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