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आरती
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सर्वरूप भगवान्

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अक्षर

ॐ जय सर्वरूप देवा, प्रभु जय सर्वरूप देवा ।

कण-कण में तुम व्याप्त, सब जग के तुम देवा ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

तुम ही ब्रह्मा, तुम ही विष्णु, तुम ही शिव अविनाशी ।

शक्ति, सूर्य, गणपति तुम ही, तुम ही घट-घट वासी ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

सृष्टि के तुम हो रचियता, पालक और संहारक ।

अज्ञान तिमिर के नाशक, ज्ञान प्रकाश के कारक ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

निर्गुण, सगुण स्वरूप तुम्हारे, अगम अगोचर माया ।

जो भी जिस रूप में ध्यावे, वही रूप तुम पाया ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

दुःख-हरता, सुख-कर्ता तुम ही, भव-भय से तारनहारा ।

शरणागत की लाज बचाओ, तुम ही एक सहारा ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

प्रेम, शांति, आनंद स्वरूप, तुम ही सत्य सनातन ।

तुम्हारी कृपा से ही पावन, यह जीवन का कण-कण ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

जो कोई आरती तेरी गावे, श्रद्धा सहित मन से ।

मनवांछित फल पावे, छूटे सकल बंधन से ॥ ॐ जय सर्वरूप देवा ॥

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