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आरती
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Om Jai Lakshmi Ramana — ॐ जय लक्ष्मी रमणा

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अक्षर

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।

सत्यसनातन भजमन, सत्यसनातन भजमन,

अचल अविचल तामना॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

रत्नजड़ित सिंहासन पर, अद्भुत छवि राजे।

स्वामी अद्भुत छवि राजे।

नारद करत नित गायन, नारद करत नित गायन,

घण्टा शंख बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो।

स्वामी द्विज को दरस दियो।

बूढ़े ब्राह्मण बनकर, बूढ़े ब्राह्मण बनकर,

कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

दुर्बल भील कराल, जिन पर कृपा करी।

स्वामी जिन पर कृपा करी।

चक्रपाणि भगवान, चक्रपाणि भगवान,

दुख हरण सुखकारी॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो।

स्वामी छिन-छिन रूप धरयो।

श्रद्धा सहित जो पूजे, श्रद्धा सहित जो पूजे,

मनवांछित फल दियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

शालिग्राम भगवान की, आरती जो कोई गावे।

स्वामी आरती जो कोई गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, कहत शिवानन्द स्वामी,

मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

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