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आरती
आरती

शारदा माता आरती

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अक्षर

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

श्वेत वस्त्र श्वेताम्बर सोहे, श्वेत कमल पर बैठी मैया।

वीणा पुस्तक हाथ में सोहे, हंस वाहिनी मैया॥

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

ज्ञान बुद्धि विद्या की दाता, तू ही जग की पालनहारी।

अज्ञान तिमिर को दूर करो, हे मैया वरदानी॥

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

जो कोई तेरी आरती गावे, मनवांछित फल पावे।

पुत्रहीन को पुत्र दे मैया, निर्धन को धन दे मैया॥

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

शारदा मैया तेरी महिमा न्यारी, भक्तन की तू है रखवारी।

सकल मनोरथ पूर्ण करो, हे मैया हितकारी॥

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

प्रेम सहित जो आरती गावे, भवसागर से तर जावे।

कहत 'सेवक' शरण तिहारी, मैया पार लगावे॥

ॐ जय शारदे मैया, जय शारदे मैया।

मैया शारदा तोरे दरबार, जो आवे सो पावे सुख चार॥

पाठ पूर्ण

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