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आरती
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कर्पूरगौरं करुणावतारम् — शिव आरती

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अक्षर

कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि॥

चन्द्रशेखरं चन्द्रमौलि, गंगाधरं गिरिजापति।

त्रिलोचन त्रिपुरारि देवा, नमामि शंकर उमापति॥

जय शिव शंकर, जय गंगाधर।

करुणा के सागर, जय जय महेश्वर॥

नाग लपेटे अंग सुहावन, भस्म लगावे अंग।

गले रुद्राक्ष विराजत, जटा में गंगा संग॥

डम डम डमरू बाजे, त्रिशूल धारी।

जय शिव शंकर, जय गंगाधर, जय जय त्रिपुरारी॥

कैलाशपति कैलाशी, अविनाशी अविनाशी।

जय शिव शंकर, जय गंगाधर, जय जय अविनाशी॥

भक्तों के दुःख हरते, सुख देते हो।

जय शिव शंकर, जय गंगाधर, जय जय सुखदाता हो॥

जो कोई नर नारी, आरती गावे।

शिव लोक में जाकर, परम पद पावे॥

जय शिव शंकर, जय गंगाधर, जय जय शिव शंकर॥

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