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आरती
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भगवान पुरुषोत्तम आरती

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अक्षर

जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।

भक्तन के प्रतिपालक, तुम हो दीनबंधु देवा ॥

अधमा उद्धारन कारण, प्रगटे जग में देवा।

शंख चक्र गदा पद्म धर, तुम हो लक्ष्मी देवा ॥

जय पुरुषोत्तम देवा...

क्षीर सागर में शयन करत, शेषनाग पर देवा।

नारद शारद स्तुति करत, ब्रह्मादिक देवा ॥

जय पुरुषोत्तम देवा...

जो नर तुमको ध्यावत, सो नर सुख पावत देवा।

जन्म जन्म के पाप कटत, भवसागर तर जावत देवा ॥

जय पुरुषोत्तम देवा...

धूप दीप नैवेद्य आरती, जो कोई गावत देवा।

मनवांछित फल पावत, अंत में मुक्ति पावत देवा ॥

जय पुरुषोत्तम देवा...

पुरुषोत्तम प्रभु की आरती, जो कोई गावत देवा।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावत देवा ॥

जय पुरुषोत्तम देवा...

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