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आरती
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भगवान धन्वन्तरि आरती

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अक्षर

जय धन्वन्तरि देवा, जय धन्वन्तरि देवा |

रोग-शोक से मुक्ति दिलाओ, अमृत कलश धारी देवा ||

क्षीर सागर से प्रकटे, हाथों में अमृत कलश लिए |

देवों को जीवन दिया, असुरों को तुमने हराया ||

आयुर्वेद के जनक तुम, आरोग्य के दाता हो |

त्रयताप हरण करने वाले, सबके भाग्य विधाता हो ||

पीताम्बर धारी, चतुर्भुज रूप तुम्हारा |

शंख, चक्र, जलौका, अमृत कलश है प्यारा ||

जो कोई तुमको ध्यावे, रोग-दोष मिट जावे |

काया निरोगी होवे, सुख-समृद्धि पावे ||

धन्वन्तरि देव की आरती, जो कोई नर गावे |

कहत 'सेवक' मनवांछित फल पावे ||

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