तुलसी पूजा / तुलसी कीर्तन
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नमो नमः तुलसी महारानी ।
वृन्दे वृन्दे तुलसी महारानी ॥
यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यादिकानि च ।
तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे ॥
तुलसी कृष्ण प्रियायै च नमो नमः ।
तुलसी देवी नमो नमः ॥
Namo Namah Tulasi Maharani |
Vrinde Vrinde Tulasi Maharani ||
Yani Kani Cha Papani Brahmahatyadikani Cha |
Tani Tani Pranashyanti Pradakshina Pade Pade ||
Tulasi Krishna Priyayai Cha Namo Namah |
Tulasi Devi Namo Namah ||
अर्थ: तुलसी महारानी को बारंबार नमस्कार है। हे वृन्दे, हे वृन्दे, हे तुलसी महारानी!
Salutations again and again to Tulasi Maharani. O Vrinda, O Vrinda, O Tulasi Maharani!
अर्थ: जो भी पाप मैंने किए हैं, यहाँ तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी, वे सभी पाप तुलसी महारानी की परिक्रमा के प्रत्येक कदम पर नष्ट हो जाते हैं।
Whatever sins I have committed, even those as grave as killing a Brahmin, all those sins are destroyed with every step I take in circumambulation.
अर्थ: श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय तुलसी को बारंबार नमस्कार है। तुलसी देवी को नमस्कार है।
Salutations again and again to Tulasi, who is very dear to Krishna. Salutations to Tulasi Devi.
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