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आरती
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गौरा आरती / संध्या आरती

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Chaitanya Mahaprabhu मुफ़्त
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अक्षर

(जय) जय गौराचाँदेर आरतिको शोभा |

जाह्नवी-तट-वने जग-मन-लोभा ||

दक्षिणे निताईचाँद, बामे गदाधर |

निकटे अद्वैत, श्रीनिवास छत्र-धर ||

बसियाछे गौराचाँद रत्न-सिंहासने |

आरति करेन ब्रह्मा-आदि देव-गणे ||

नरहरि-आदि करि' चामर ढुलाय |

संजय-मुकुंद-वासु-घोष-आदि गाय ||

शंख बाजे, घण्टा बाजे, बाजे करताल |

मधुर मृदंग बाजे परम रसाल ||

बहु-कोटि चंद्र जिनि' नखाँचलेर द्युति |

नीलाम्बर-पीताम्बर शोभा मन-गति ||

गौर-प्रेम-रसारणवे भासिचे भक्त |

पतित-पावन हेतु आसियाछे यत ||

शची-माता फूले गन्धे आरति करे |

भक्त-वृन्द देखे आनन्दे विहरे ||

नारद-आदि शुक-व्यास-सन-कुमार |

भक्त-गण-सह करे नमस्कार ||

जय जय गौराचाँदेर आरतिको शोभा |

जाह्नवी-तट-वने जग-मन-लोभा ||

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