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आरती
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शाकम्भरी माता आरती

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अक्षर

हरि ओम श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती।

जय शाकम्भर अम्बा, जय शाकम्भर अम्बा।

भक्त जनन की भीर हरो, माँ, पूरण करो सब कामा॥

जय शाकम्भर अम्बा...

शारदा, ब्रह्माणी, शिवानी, दुर्गा, चामुण्डा, काली।

लक्ष्मी, वैष्णवी, इन्द्राणी, सब तुम ही हो बलशाली॥

जय शाकम्भर अम्बा...

अन्नपूर्णा, अन्नदात्री, फल-फूलों की दाता।

शाक-सब्जी से पोषण करती, तुम ही जग की माता॥

जय शाकम्भर अम्बा...

सृष्टि की तुम हो जननी, पालनहार भी तुम ही।

संहारिणी भी तुम ही हो, त्रय शक्ति तुम ही तुम ही॥

जय शाकम्भर अम्बा...

रक्तदन्तिका, भीमा, भ्रामरी, शताक्षी, दुर्गा।

ये सब रूप तुम्हारे ही हैं, तुम ही हो जगदम्बा॥

जय शाकम्भर अम्बा...

जो नर नारी आरती गावे, मनवांछित फल पावे।

पुत्र, धन, यश, कीर्ति, वैभव, अंत मोक्ष को जावे॥

जय शाकम्भर अम्बा...

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