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आरती
आरती

सिद्धिदात्री माता आरती

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अक्षर

जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक और भक्त धरते हैं हम॥

तुम्हारी शरण में जो भी आता है।

सारे कष्ट मिटाकर वो सुख पाता है॥

जो मन से तेरी पूजा करता है।

वो घर बैठे ही सुख पाता है॥

तुम हो असीम शक्ति की स्वामिनी।

सारे जगत की हो तुम तारिणी॥

तुम्हारी महिमा का कोई पार नहीं।

सारे देवों को भी ये स्वीकार नहीं॥

जो भक्त श्रद्धा से तेरी आरती गाता है।

वो जीवन में कभी दुःख नहीं पाता है॥

जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥

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