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आरती
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कूष्माण्डा माता आरती

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अक्षर

कूष्माण्डा जय जग माता।

सुर नर मुनि सब करते सेवा, नाम तुम्हारा है विख्याता॥

द्वितीय रूप है तेरा माता, अष्टभुजा धारी।

कमल धनुष और बाण सुहावे, अमृत कलश धारी॥

चक्र गदा और जप माला, त्रिशूल हाथ धारी।

सिंह की सवारी करती हो, महिमा है तुम्हारी॥

सूर्य के समान तेज तुम्हारा, अंधकार मिटाती।

रोग शोक और भय हरती हो, सुख समृद्धि लाती॥

जो कोई श्रद्धा से ध्यावे, मनवांछित फल पावे।

पुत्र धन और यश की प्राप्ति, अंत मोक्ष को जावे॥

कूष्माण्डा माता की आरती, जो कोई नर गावे।

कष्ट मिटे सब जीवन के, परम पद पावे॥

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