गगन में थाल आरती — सार्वभौमिक आरती
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गगन में थाल, रवि चंद दीपक बने।
तारिका मण्डल जनक मोती जैसे जड़े॥
पवन चंवर करे, वनराय फूल चढ़ाए।
ऐसी आरती प्रभु की, सृष्टि गाती जाए॥
Gagan mein thaal, ravi chand deepak bane.
Taarika mandal janak moti jaise jade.
Pavan chanvar kare, vanraay phool chadhaaye.
Aisi aarti Prabhu ki, srishti gaati jaaye.
अर्थ: आकाश को आरती की थाली और सूर्य-चन्द्र को दीपक रूप में देखा गया है।
The sky is imagined as the aarti plate, with sun and moon as lamps.
अर्थ: तारे मोती की तरह दिव्य सजावट बनते हैं।
The stars appear like pearls in the divine offering.
अर्थ: पवन चंवर करता है और वन फूल अर्पित करता है।
The wind waves the fan and the forests offer flowers.
अर्थ: पूरी सृष्टि प्रभु की आरती गाती है, यह सार्वभौमिक भाव है।
All creation is seen as singing the Lord’s aarti.
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