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आरती
आरती

भगवान् यशोदानलाल

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अक्षर

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।

श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।

लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर करत हैं गुंज माली ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट सिर पर, सोहे मुकुट लटकन फर-फर ।

सुंदर पीताम्बर तन पर, जय हो गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चरणों से निकली गंगा, श्री तुलसी मैया श्यामा रंगा ।

स्मरण से मिटते सब दंगा, जय हो गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

दीनबंधु दुख हरता, तुम ही मेरे भाग्य विधाता ।

मनमोहन मन हरता, जय हो गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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