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आरती
आरती

भगवान् श्यामसुन्दर

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अक्षर

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ।

मोर मुकुट पीताम्बर धारी, छवि पे बलिहारी जाऊँ ॥

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ ॥

गोकुल में तुम माखन चोर, यशोदा के प्यारे लाल।

राधा संग रास रचाया, गोपीजन के प्रतिपाल ॥

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ ॥

गिरि गोवर्धन तुमने उठाया, इंद्र का मान मिटाया।

कालिया नाग नाथ कर, भक्तों का कष्ट मिटाया ॥

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ ॥

बंसी बजाओ मधुर धुन में, मन को हरषाओ।

पतित पावन नाम तिहारो, भवसागर से तारो ॥

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ ॥

श्यामा प्यारी संग विराजे, युगल छवि मन भावे।

जो कोई आरती तेरी गावे, मनवांछित फल पावे ॥

जय जय श्री श्यामसुंदर, आरती तुम्हारी गाऊँ ॥

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