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आरती
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भगवान् श्रीव्रजराज

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अक्षर

जय जय श्री व्रजराज, आरती गाऊँ तेरी।

नित नित दर्शन पाऊँ, मिटे विपदा मेरी ॥

श्याम सुंदर तन सोहे, पीताम्बर धारी।

मोर मुकुट सिर पर, बंसी अधर प्यारी ॥

कानन कुंडल झलके, गल वैजयंती माला।

भक्तन के मन भावे, गोकुल का लाला ॥

जय जय श्री व्रजराज, आरती गाऊँ तेरी।

नित नित दर्शन पाऊँ, मिटे विपदा मेरी ॥

वृंदावन के वासी, यमुना तट खेले।

गौएँ चरावे प्यारे, ग्वालन संग मेले ॥

गोवर्धन पर्वत धारे, इंद्र मान भंजन।

शरण आए की रक्षा, करते रंजन ॥

जय जय श्री व्रजराज, आरती गाऊँ तेरी।

नित नित दर्शन पाऊँ, मिटे विपदा मेरी ॥

माखन चोर कहाए, गोपियन के प्यारे।

रास रचाया संग में, मनमोहन न्यारे ॥

प्रेम सुधा बरसाई, हर ली सब पीड़ा।

भव सागर से तारे, भव बंधन तोड़ा ॥

जय जय श्री व्रजराज, आरती गाऊँ तेरी।

नित नित दर्शन पाऊँ, मिटे विपदा मेरी ॥

दीनबंधु दुखहारी, पतित पावन नाम।

जो कोई शरण आवे, पूरण होवे काम ॥

करुणा सिंधु दयालु, भक्तन के हितकारी।

सकल मनोरथ पूरण, जय जय गिरधारी ॥

जय जय श्री व्रजराज, आरती गाऊँ तेरी।

नित नित दर्शन पाऊँ, मिटे विपदा मेरी ॥

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