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आरती
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भगवान् श्रीव्रजनन्दन

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अक्षर

आरती श्री व्रजनंदन की, आरती श्री कृष्ण मुरारी की ॥

जय जय श्री व्रजनंदन, जय जय श्री कृष्ण मुरारी ॥

श्याम सुंदर छवि तेरी, मन को हरती है ।

मोर मुकुट सिर सोहे, बंसी अधर धरती है ॥

गल वैजयंती माला, पीताम्बर धारी ।

आरती श्री व्रजनंदन की, आरती श्री कृष्ण मुरारी की ॥

माखन चोर कहाए, गोकुल के प्यारे ।

गोवर्धन को उठाया, भक्तों के सहारे ॥

कालिया नाग नाथ्यो, लीला अति न्यारी ।

आरती श्री व्रजनंदन की, आरती श्री कृष्ण मुरारी की ॥

राधा रानी संग विराजे, गोपियों के प्राण ।

यशोदा मैया के लाला, नन्द के दुलारे ॥

दीनबंधु दुखहर्ता, भव भय हारी ।

आरती श्री व्रजनंदन की, आरती श्री कृष्ण मुरारी की ॥

पतित पावन नाम तेरा, भवसागर तारी ।

शरण में जो भी आए, उसकी लाज बचाई ॥

आरती श्री व्रजनंदन की, आरती श्री कृष्ण मुरारी की ॥

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