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आरती
आरती

भगवान् श्रीरघुवरजी

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अक्षर

आरती कीजै रघुवर जी की।

सत्य सनातन परमानंद की ॥

ताके शीश मुकुट सोहे,

कानन कुंडल छवि मोहे।

अंग-अंग चंदन सोहे,

मस्तक तिलक अति सोहे ॥

धनुष बाण कर सोहे,

भक्तन के मन मोहे।

दुष्टन को संहारे,

संतन को तारे ॥

सिया संग शोभा पावे,

लक्ष्मण संग मन भावे।

भरत शत्रुघ्न सेवा करें,

हनुमत चरणन में रहें ॥

आरती कीजै रघुवर जी की।

सत्य सनातन परमानंद की ॥

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