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आरती
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भगवान् श्रीगोपालजी

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अक्षर

जय गोपाल, जय गोपाल, जय गोपाल प्यारे ।

भक्तन के तुम प्राण धन, नैनन के तारे ॥

श्याम सलोना रूप तिहारो, मोर मुकुट सिर सोहे ।

बंसी अधर विराजत प्यारी, मनमोहन मन मोहे ॥

जय गोपाल, जय गोपाल, जय गोपाल प्यारे ।

भक्तन के तुम प्राण धन, नैनन के तारे ॥

माखन चोर कहाए तुम ही, गोवर्धन गिरधारी ।

कालिय मर्दन कर सुख दीन्हा, लीला अति सुखकारी ॥

जय गोपाल, जय गोपाल, जय गोपाल प्यारे ।

भक्तन के तुम प्राण धन, नैनन के तारे ॥

राधा संग रास रचाया, गोपिन के मन भाए ।

प्रेम सुधा बरसाई तुमने, सब जग को हर्षाए ॥

जय गोपाल, जय गोपाल, जय गोपाल प्यारे ।

भक्तन के तुम प्राण धन, नैनन के तारे ॥

दीनबंधु दुखहर्ता तुम हो, भवसागर के तारे ।

शरणागत की लाज बचाओ, भव बाधा निस्तारे ॥

जय गोपाल, जय गोपाल, जय गोपाल प्यारे ।

भक्तन के तुम प्राण धन, नैनन के तारे ॥

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