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आरती
आरती

भगवान् श्रीगोपालजी

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अक्षर

जय जय श्री गोपाल, जय जय श्री गोपाल ।

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

नंद के लाला, यशोदा के प्यारे ।

गोकुल के राजा, ब्रज के दुलारे ॥

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

मुरली मनोहर, माखन चोर ।

भक्तों के संकट, हरते हैं घोर ॥

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

गौवों के रखवाले, ग्वालों के संगी ।

राधा के मोहन, प्रेम के रंगी ॥

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

मीरा के गिरधर, सूर के स्वामी ।

पतित पावन, अंतर्यामी ॥

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

जो कोई गावे, आरती तुम्हारी ।

सुख संपत्ति पावे, मिटे दुख भारी ॥

आरती श्री गोपाल जी की, आरती श्री गोपाल जी की ॥

जय जय श्री गोपाल, जय जय श्री गोपाल ।

जय जय श्री गोपाल, जय जय श्री गोपाल ॥

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