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आरती
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भगवान् श्रीगिरिधारी

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अक्षर

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

गिरिवर धारी, गोवर्धन धारी, प्रभु गिरिवर धारी ।

इंद्र कोप से रक्षा करी, ब्रज रक्षा करी ॥

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

बंसी बजावत, गौएँ चरावत, प्रभु बंसी बजावत ।

वृंदावन में लीला रचावत, मन हरषावत ॥

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

माखन चोर कन्हैया, यशोदा के ललैया, प्रभु माखन चोर कन्हैया ।

गोपियों के तुम प्राण प्रिया, सुख दैया ॥

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

राधा रानी के प्यारे, मोर मुकुट धारे, प्रभु राधा रानी के प्यारे ।

श्याम सुंदर प्यारे, मनोहारी ॥

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

आरती गावे जो कोई, मनवांछित फल पावे, प्रभु मनवांछित फल पावे ।

कष्ट मिटे सब तन के, सुख पावे ॥

ॐ जय गिरिधारी, प्रभु जय गिरिधारी ।

भक्तन के तुम रक्षक, दुखहारी ॥

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