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आरती
आरती

भगवान् मुरलीधर

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अक्षर

आरती कुंज बिहारी की |

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

गले में बैजंती माला |

बजावै मुरली मधुर बाला ||

श्रवण में कुंडल झलकाला |

नंद के आनंद नंदलाला ||

आरती कुंज बिहारी की |

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

गगन सम अंग कांति काली |

राधिका चमक रही आली ||

लतन में ठाढ़े बनमाली |

भ्रमर करत है गुंजन माली ||

आरती कुंज बिहारी की |

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

कनक मय मोर मुकुट बिलसै |

देवता दरसन को तरसै ||

गगन सों सुमन रासि बरसै |

बजे मुरचंग मधुर मृदंग ||

आरती कुंज बिहारी की |

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

दीपक ज्योति जले झलके |

तुलसी दल मोहन मन ललके ||

छवि निरखत मोहन मन ललके |

आरती कुंज बिहारी की ||

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

जो यह आरती गावै |

सो पदवी बैकुंठ पावै ||

कहत 'हरिदास' स्वामी |

हरिहरि संग सोभा पावै ||

आरती कुंज बिहारी की |

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||

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