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आरती
आरती

भगवान् मर्यादापुरुषोत्तम

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अक्षर

आरती कीजै श्री रघुवर जी की।

सत्य सनातन, सुख संदन, सीता पति की॥

पहली आरती धनुष की तोड़ी।

रावण की भुजा, प्रभु ने मरोड़ी॥

दूसरी आरती लंका को घेरा।

कुम्भकरण को, प्रभु ने पछेरा॥

तीसरी आरती मेघनाद मारा।

लक्ष्मण जी को, शक्ति से उबारा॥

चौथी आरती भरत जी की भाई।

अयोध्या में, प्रभु राज बिठाई॥

पाँचवीं आरती सब विधि पूरी।

मनकामना पूरण, करत प्रभु दूरी॥

आरती कीजै श्री रघुवर जी की।

सत्य सनातन, सुख संदन, सीता पति की॥

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