Skip to main content मुख्य सामग्री पर जाएँ
English में भी उपलब्ध — ऊपर नेविगेशन से बदलें
आरती
आरती

बाबा गोरखनाथ आरती

पाठ पढ़ें, सुनें या अर्थ के साथ अपनी गति से आगे बढ़ें।

Gorakhnath मुफ़्त
सुनें या देखें

पाठ के साथ जुड़ें

वीडियो देखेंजब आप तैयार हों तब खोलें खोलेंबंद करें
आपका पाठ

अपनी गति से पढ़ें

मूल पाठ, रोमन लिपि या अर्थ चुनें। अक्षरों का आकार और पृष्ठभूमि भी बदल सकते हैं।

अक्षर

जय गोरख देवा, जय गोरख देवा। कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा॥

शीश जटा अति सुंदर, भाल चन्द्र सोहे। कानन कुंडल झलकत, निरखत मन मोहे॥

गल सेली विच नाग सुशोभित, तन भस्मी धारी। आदि पुरुष योगीश्वर, संतन हितकारी॥

नाथ निरंजन आप ही, घट घट के वासी। करत कृपा निज जन पर, मेटत यम फांसी॥

अगम अगोचर आप हो, सब जग के स्वामी। काटो कष्‍ट हमारे, अंतर्यामी॥

माया मोह से दूर हो, वैरागी कहलाए। अलख निरंजन नाम जपे, भवसागर तर जाए॥

सिद्ध चौरासी आप ही, नव नाथों के नाथ। दया करो हे गोरख, सब पर धर हाथ॥

गुरु गोरख नाथ की आरती, निशदिन जो गावे। विनवित बाल त्रिलोकी, मुक्ति फल पावे॥

पाठ पूर्ण

एक शांत क्षण लें

पाठ के भाव को मन में रहने दें, फिर चाहें तो दोबारा पढ़ें या संबंधित प्रार्थना चुनें।

संग्रह पर जाएँ
Kriyasya
✦ Talk to AI Companion →