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आरती
आरती

सीता माता आरती

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अक्षर

आरती श्री जनक दुलारी की |

सीता जी रघुवर प्यारी की ||

जग जननी जग सुख करनी की |

महिमा अपरम्पार तुम्हारी की ||

अति सुकुमार रूप मन भावन |

कोटि चंद्र छवि लज्जित पावन ||

दिव्य वस्त्र आभूषण सोहे |

देखि देखि मन मुनि जन मोहे ||

स्वर्ण सिंहासन पर तुम बैठी |

राम संग शोभा अति बैठी ||

असुर निकंदन राम की शक्ति |

भक्तों की तुम हो अनुरक्ति ||

पतिव्रता धर्म की तुम मूर्ति |

त्याग तपस्या की तुम पूर्ति ||

लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न भाई |

सेवा में सब शीश झुकाई ||

हनुमत सेवक चरणन के प्यारे |

पल पल सुमिरन करते सारे ||

जो नर आरती तुम्हारी गावे |

जन्म जन्म के पाप नशावे ||

आरती श्री जनक दुलारी की |

सीता जी रघुवर प्यारी की ||

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