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आरती
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जानकी माता आरती

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Sita मुफ़्त
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अक्षर

आरती कीजे श्री जनक लाली की ।

रामचंद्र जी के प्रियतमा प्यारी की ॥

प्रथम पूजा प्रभु रामचंद्र की ।

दूजी पूजा सिया महारानी की ॥

कंचन थाल कपूर की बाती ।

जग मग ज्योति जले सारी राती ॥

सिया सुकुमारी परम सुंदरी ।

शोभा लखि कोटि काम वारी ॥

अंग अंग में शोभा न्यारी ।

कोटि चंद्र की छबि वारी ॥

सिया राम के मन को भावे ।

भक्तन के मन को हर्षावे ॥

जो यह आरती प्रेम से गावे ।

सिया राम के धाम को पावे ॥

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