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आरती
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भगवान गोपाल आरती

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अक्षर

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

गौर श्याम मुख निरखत रीझै।

हरि हर बंसी की धुन सुन रीझै॥

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

कंचन थाल कपूर की बाती।

जग मग ज्योति जले दिन राती॥

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

मोर मुकुट पीताम्बर सोहै।

कुंडल की छवि मन को मोहै॥

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

श्री राधा मोहन मन हर लीजै।

चरण कमल बलिहारी कीजै॥

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

यह आरती जो कोई गावै।

परमानंद परम पद पावै॥

आरती जुगल किशोर की कीजै।

तन मन धन न्योछावर कीजै॥

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